5 रोचक जानकारी अग्रसेन जयंती के बारे में, 5 interesting facts about Agrasen Maharaj jayanti 2021


 

कौन थे महाराजा अग्रसेन का जीवन परिचय इनकी जयंती कब है, व इतिहास, और अनमोल वचन की सीख क्या है? {Biography of Agrasen Maharaj Jayanti,Agrasen G Quotes History, birth all in Hindi me}


अग्रवाल समाज एवं वैश्य समाज में महाराजा अग्रसेन को उनका जनक माना जाता हे ! वैसे तो अग्रसेन महाराज का जन्म क्षेत्रीय समाज में हुआ! एक मान्यता के अनुसार उस समय में पशुओं की आहुति बलि के रूप में दी जाति थी, इस प्रथा को अग्रसेन जी महाराज समर्थन नहीं करते थे ,एवं इसी वजह से इन्होंने क्षेत्रीय समाज को छोड़कर वैश्य संप्रदाय को स्वीकार किया.

इन्होंने ही अग्रवाल समाज की शुरुआत की थी, इन्हीं मान्यताओं के अनुसार उनको अग्रवाल समाज का देव,सर्वे सर्वा, जन्मदाता माना जाता है,उन्होंने उस वक्त में व्यवसायियों के राज्य की परिकल्पना व स्थापना को मूर्त रूप दिया, इसे उन्होंने उत्तरी भाग में बसाया था, जिसको अग्रोहा नाम से जाना गया और ये जाना पहचाना स्थान है !


अग्रवाल समाज में अठारह गौत्र की की उत्पत्ति इनके 18 पुत्रों के द्वारा विद्वान ऋषियों के सानिध्य व मार्गदर्शन में अठारह यज्ञों द्वारा हुई थी!


अग्रसेन जयंती कब मनाई जाती है?

2021 में यह अग्रसेन जयंती 7 October को मनाई जाती है.अग्रोहा में अग्रवाल समाज द्वारा अग्रसेन जयंती कैसे मनाई जाती है!


इनकी जयंती के 15 दिन पहले ही समारोह प्रारंभ हो जाता है, इस जयंती के दिन को विशेष बनाने के लिए समाज के लोग विशेष तैयारी करते हैं। अग्रवाल समाज पूरे धार्मिक भक्ति भाव के साथ यह दिन मनाता है, इस दिन प्रातः काल आशीर्वाद लेने हेतु कुल देवी के मंदिर को जाते हैं, पारंपरिक मान्यता के अनुसार अग्रवाल समाज के भक्त इस क्षेत्र के अनेक पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, इस अवसर पर समाज के प्रतिभाशाली लोगों के द्वारा नाट्य इत्यादि का आयोजन होता है, बच्चों के लिए भी कुछ विशेष प्रकार के कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं, एवं इसमें कुछ प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती है, 


इस जयंती को उत्सव के तौर पर संपूर्ण समाज आपस में मिलजुल कर मनाते हैं ,जो कि इस उत्सव का महत्वपूर्ण उद्देश्य होता है कि, समाज के सभी लोग एक दूसरे के प्रति अपनत्व, जुड़ाव महसूस करें, इसमें अग्रवाल समाज के अलावा वैश्य समाज के महेश्वरी जैन खंडेलवाल इत्यादि भी हिस्सा लेते हैं, और इस त्योहार को बड़ी खुशी के साथ सेलिब्रेट करते हैं! जयंती के दिवस एक महा रैली निकाली जाती है, जो कि निर्धारित, स्वरूप के अनुरूप होती है!


इसमें जो पारंपरिक रिवाज के अनुसार शोभा यात्रा महारैली भी आयोजित की जाती है,जो की शहर के मुख्य स्थानों से होकर निकलती है, यह महारैली पूरे हरियाणा की महत्वपूर्ण शहर एवं कस्बों में भी जाती है, अमरोहा शहर में इसके लिए विशेष रुप से तैयारियां होती है। शहर के महत्वपूर्ण जगहों को सजाया जाता हे। इस शोभायात्रा महारैली के अंतर्गत महाराजा श्री अग्रसेन जी के चित्रों को भक्ति पूर्ण तरीके से उपयोग किया जाता है जोकि जयंती के इस विशेष दिन के लिए पहले से ही तैयार कर लिए जाते हैं। 


संपूर्ण samaj के लिए यह एक पर्व का दिन होता है, अग्रसेनजी के जयंती दिवस पर पारंपरिक लंगर का आयोजन भी होता है, जिसमें अग्रवाल समाज के लोगों द्वारा यह विशेष प्रकार से ख्याल रखा जाता है कि, प्रसाद सभी भक्त लोगों के सही तरह से बांटा जाए जोकि, अग्रसेन जयंती समारोह का एक विशेष कार्य भी है,एवम् इसको सब लोग बड़ी खुशी के साथ धूमधाम से सदभावना पूर्वक मनाते हैं!


महाराजा अग्रसेन ने इस जगह को बसाया जिसका नाम अग्रोहा है! अग्रवाल समुदाय द्वारा इसे एक तीर्थ के तौर पर माना जाता है, महाराजा अग्रसेन जी को अग्रवाल समाज और अग्रहरी समुदाय के द्वारा देव के रूप में भक्ति भाव से पूजा जाता है, इनकी लोकप्रियता उस समय और आज भी लोगों में बहुत अधिक है, एवं हरियाणा में व्यापारी वर्ग के स्थापना का इनको श्रेय दिया जाता है, इनकी जयंती को हर वर्ष अक्टूबर माह को मनाया जाता है!


महाराजा अग्रसेन जी का जन्म कब कहां हुआ है?


इनका जन्म भगवान श्री रामचंद्र जी के पुत्र कुश के वंश की पीढ़ी में वल्लभ सेन के घर में द्वापर युग के अंतिम काल {महाभारत काल के समय}अश्विन शुक्ल एकम को हुआ था! जिसको विश्व भर में आज अग्रसेनजी की जयंती के रूप में मनाया जाता रहा है,एक अनुमान के अनुसार विक्रम संवत के प्रारम्भ से 3130 वर्ष पहले हुआ था!इनके पिता प्रतापनगर के महाराजा थे, एवं ये माता श्रीभगवती देवी जी के ज्येष्ठ पुत्र थे, आज के समय प्रतापनगर, राजस्थान एवं हरियाणा के मध्य सरस्वती नदी के तट पर स्थित था!


महाराजा अग्रसेन जी की का जीवन परिचय  Hindi Biography of maharaja Agrasen


अग्रसेनजी राजा श्रीवल्लभ सेन के सबसे जेष्ठ पुत्र थे, जैसा कि कहा जाता हैं, इनका जन्म कलयुग से पूर्व द्वापर युग के अंतिम काल में हुआ, उस समय राम राज्य हुआ करता था, कहने का तात्पर्य है कि राजा सिर्फ शासक ना होकर प्रजा के हित को महत्व देते हुए कार्य कीया करते थे, देश व जनता के सेवा को महत्व देते थे,इन सभी आदर्शों का पालन अग्रसेन भी किया करते थे!


जिसके कारण कालखंड के स्वर्णिम पन्नों पर उनका नाम अमर हो चुका है, प्रारंभ में इनके नगरी प्रतापनगर थी, लेकिन इन्होंने ही प्रसिद्ध अग्रोहा नगर की स्थापना की, इनके मन में जनकल्याण की भावनाओं के साथ ही जानवरों के प्रति, पशुओं के प्रति भी दया का भाव रहता था! जिसकी वजह से इन्होंने यज्ञ के दौरान दी जाने वाली पशुओं की आहुति को अस्वीकार कर दिया एवं अपने क्षेत्रीय समाज को छोड़कर वैश्य समाज के स्थापना की नींव रखी! इस तरह से इन्होंने Agarwal samaj की शुरुआत की, इनके नगर में लोग बहुत ही खुशहाल व धन धान्य  से सम्पन्न हुआ करते थें, और दूर-दूर तक इनकी ख्याति जनप्रिय राजा के रूप में हर तरफ फैली हुई थी! 15 साल की आयु में महाभारत काल के समय इन्होंने महाभारत के युद्ध में पांडवों का पक्ष लेते हुए युद्ध में भाग लिया था!

अग्रसेन एक वैश्य राजा थे, इन्होंने अपने लोगों के हित व लाभ के लिए वानिका धर्म को अपनाया था!


महाराजा अग्रसेन जी का विवाह एवं पत्नी का नाम क्या है?


अग्रसेनजी का विवाह नागराज कन्या माधवी के साथ में हुआ था,माधवी एक बहुत ही गुणवान संस्कारी व सुंदर कन्या थी,इस विवाह हेतु  स्वयंबर आयोजित किया गया, इसमे राजा इंद्र ने भी भाग लिया, परन्तु कन्या माधवी ने अग्रसेन को ही अपना वर चुना, जिसके कारण से राजा इंद्र स्वयंम को अपमानित महसूस करने लगे एवम् इसके पश्चात उन्होंने प्रतापनगर मे अकाल जैसी स्थिती उत्पन्न कर दी थी, इसके वजह से राजा अग्रसेन ने इंद्र देव पर आक्रमण कर दिया था, इस युद्ध में अग्रसेन जी की स्थिती बहुत अच्छी थी, जिससे कि उनकी जीत को लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन इस सब के बीच ही देवताओं ने नारद मुनि के साथ मिल कर इंद्र एवम् अग्रसेन के मध्य का बैर खत्म करवा दिया!


Agarwal samaj  की उत्पत्ति कैसे हुई है?


राजा अग्रसेन द्वारा वैश्य समुदाय की उत्पत्ति करने के पश्चात इसको व्यवस्थित करने के लिए इन्होंने इस विषय में अट्ठारह यज्ञ किए गए और इन्हीं के आधार पर इस Agrawal samaj में गोत्र का बनाए गए! अग्रसेन जी कुल 18 पुत्र थे,उन सभी 18 पुत्रो को यज्ञ के लिए संकल्प दिया गया था, इन यज्ञों को 18 विद्वान ऋषियों ने सम्पन्न करवाया था! इन सभी ऋषियों के  आधार पर ही इस समाज में गौत्र की उत्त्पत्ति हुई थी, जिसके द्वारा इस विशाल व भव्य 18 गोत्र वाले Agrawal samaj का निर्माण किया पुरा किया!


Agarwal samaj  की गोत्र कौन-कौन से हैं?

•ऐरन •बंसल •बिंदल
•भंदल•धारण•गर्ग
•गोयल •गोयन•जिंदल
•कंसल •कुच्छल•मधुकुल
•मंगल •मित्तल•नागल
•सिंघल•तायल•तिंगल

अग्रसेन महाराज के जीवन का अंतिम समय [Maharaj  Agrasen Life's Last Time ]


एक श्रेष्ठ राज्य की स्थापना करने के पश्चात इन्होंने इसका उत्तरदायित्व अपने बड़े पुत्र , विभु को सौंप दिया था! जिसके पश्चात वह वन को चले गए उन्होंने एक 100 वर्ष तक शासन की जिम्मेदारी को निभाया उस समय को रामराज्य जैसा बताया जाता है !और इनको एक न्याय प्रिय, दयालु हृदय वाला ,लोक कल्याणकारी गुणों से पूर्ण देव तुल्य माना जाता है!


अग्रसेन जी महाराज की आरती
जय श्री अग्र हरे, स्वामी जय श्री अग्र हरे। कोटि कोटि नत मस्तक, सादर नमन करें।। जय श्री। आश्विन शुक्ल एकं, नृप वल्लभ जय। अग्र वंश संस्थापक, नागवंश ब्याहे।। जय श्री। केसरिया थ्वज फहरे, छात्र चवंर धारे। झांझ, नफीरी नौबत बाजत तब द्वारे।। जय श्री। अग्रोहा राजधानी, इंद्र शरण आये! गोत्र अट्ठारह अनुपम, चारण गुंड गाये।। जय श्री। सत्य, अहिंसा पालक, न्याय, नीति, समता! ईंट, रूपए की रीति, प्रकट करे ममता।। जय श्री। ब्रहम्मा, विष्णु, शंकर, वर सिंहनी दीन्हा।। कुल देवी महामाया, वैश्य करम कीन्हा।। जय श्री। अग्रसेन जी की आरती, जो कोई नर गाये! कहत त्रिलोक विनय से सुख संम्पति पाए।। जय श्री!


अग्रसेन जयंती पर लेख की प्रेरणादायक सीख:-

हम सब को महाराजा अग्रसेनजी के द्वारा की गई सीख ये है की, जीवन में मानव कल्याण एवं लोगों की सहायता के लिए काम करना चाहिए, हिंसक प्रवृत्ति को त्याग कर समाज के भले के लिए हमें कार्य करना चाहिए और जीव-जंतुओं पर अत्याचार नहीं करना चाहिए। लोगों की सहायता जनकल्याण का सुख ही हमें आत्मिक सुख दे सकता है, जिसका आनंद व अनुभूति अनंत होती!



FAQ

Q.अग्रसेन जयंती कब मनाई जाती हैं ? What is the Date of Agrasen Jayanti 2021 

Ans.आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा यानी कि यह नवरात्री के पहले दिन को अग्रसेन जयंती मनाई जाती है ! 


Q. महाराजा अग्रसेन सूर्यवंश के किस पीढ़ी से थे?

Ans. यह भगवान राम के पुत्र कुश के 34वीं पीढ़ी से थे!


Q. महाराजा अग्रसेन के माता-पिता का क्या नाम था?

Ans. इनके पिता का नाम श्रीवल्लभ सेन, वह माता का नाम श्री भगवती देवी था!



नोट:-अगर इस लेख में किसी को कोई त्रुटि या आपत्ति हो तो इसमें वह सुधार कर दिया जाएगा, हमारा उद्देश्य किसी भी संप्रदाय समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है, यहां दिया गया लेख सिर्फ एक जानकारी के रूप में प्रस्तुत किया गया है,

उपरोक्त लेख में सभी आवश्यक सावधानियां बरती गई है, लेकिन मूल जानकारी ही प्रमाणित ,विश्वसनीय एवं मान्य होगी!

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